Online लेखन प्रतियोगिता
11:59 pm, 2 जनवरी से पहले अपनी प्रविष्टी iitbwriteup@gmail.com पर अवश्य भेज दें। प्रत्येक प्रतियोगी की केवल एक प्रविष्टी को ही मान दिया जाएगा।
दो सर्वोत्तम प्रविष्टियों को 500/- रुपये प्रति विजेता का नकद इनाम दिया जाएगा।
IIT-Bombay के हिंदी समूह 'वाणी' का ब्लॉग
मैं पल दो पल का शायर हूँ, पल दो पल मेरी कहानी हैं
पल दो पल मेरी हस्ती है, पल दो पल मेरी जवानी हैं
मुझ से पहले कितने शायर, आये और आकर चले गए
कुछ आहे भर कर लौट गए, कुछ नग्में गा कर चले गए
वो भी एक पल का किस्सा थे, मैं भी एक पल का किस्सा हूँ
कल तुम से जुदा हो जाऊंगा, वो आज तुम्हारा हिस्सा हूँ
कल और आयेंगे, नग्मों की खिलती कलियाँ चुननेवाले
मुझ से बेहतर कहनेवाले, तुम से बेहतर सुननेवाले
कल कोई मुझको याद करे, क्यों कोई मुझको याद करे
मसरूफ ज़माना मेरे लिए, क्यों वक्त अपना बरबाद करे
तू बीन बतायें मुझे ले चल कहीं
जहां तू मुस्कूरायें मेरी मंझिल वहीं
मिठी लगी, चख के देखी अभी
मिश्री की डली, जिंदगी हो चली
जहां हैं तेरी बाहें, मेरा साहील वहीं
मन की गली तू पुहारों सी आ
भीग जायें मेरे ख्वाबों का काफिला
जिसे तू गुनगुनायें मेरी धून हैं वहीं
6.) आज़ादियाँ - Aazaadiyan
पैरों की बेड़ियाँ ख्वाबों को बांधे नहीं रे, कभी नहीं रे मिट्टी की परतों को नन्हे से अंकुर भी चीरे, धीरे-धीरे इरादे हरे-भरे, जिनके सीनों में घर करे वो दिल की सुने, करे, ना डरे, ना डरे सुबह की किरनों को रोकें, जो सलाखें है कहाँ जो खयालों पे पहरे डाले वो आँखें है कहाँ पर खुलने की देरी है परिंदे उड़ के चूमेंगे आसमां आसमां आसमां आज़ादियाँ, आज़ादियाँ मांगे न कभी, मिले, मिले, मिले आज़ादियाँ, आज़ादियाँ जो छीने वही, जी ले, जी ले, जी ले सुबह की किरनों... कहानी ख़तम है या शुरुआत होने को है सुबह नयी है ये या फिर रात होने को है आने वाला वक़्त देगा पनाहें या फिर से मिलेंगे दो राहें खबर क्या, क्या पता7.) नाव - Naav
चढ़ती लहरें लांघ न पाए क्यूँ हांफती सी नाव है तेरी तिनका-तिनका जोड़ ले सांसें क्यूँ हांफती सी... उलटी बहती धार है बैरी के अब कुछ कर जा रे बंधू जिगर जुटा के पाल बाँध ले, है बात ठहरी जान (शान) पे तेरी, हैय्या हो की तान साध ले, जो बात ठहरी जान (शान) पे तेरी, चल जीत-जीत लहरा जा, परचम तू लाल फहरा जा, अब कर जा तू या मर जा, कर ले तैयारी, उड़ जा बन के धूप का पंछी, छुड़ा के गहरी छाँव अँधेरी, छाँव अँधेरी, तिनका-तिनका जोड़... रख देगा झंकझोर के तुझे, तूफानों का घोर है डेरा, भंवर से डर जो हार मान ले, काहे का फिर जोर है तेरा, है दिल में रौशनी तेरे, तू चीर डाल सब घेरे, लहरों की गर्दन कसके डाल फंदे रे, कि दरिया बोले वाह रे पंथी, सर आँखों पे नाव है तेरी चढ़ती लहरें लांघ...